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05/10/2025

Do not eat food during a solar eclipse! How many times has you heard this? Solar Eclipses (Surya Grahan) has a long history of beliefs, traditions and ritual...

दौलताबाद किला , मूल रूप से देवगिरी किला , भारत के महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास दौलताबाद गाँव में स्थित एक ऐतिहासिक किला...
24/03/2025

दौलताबाद किला , मूल रूप से देवगिरी किला , भारत के महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास दौलताबाद गाँव में स्थित एक ऐतिहासिक किला है । यह यादवों की राजधानी (9वीं शताब्दी - 14वीं शताब्दी ई.) थी, थोड़े समय के लिए दिल्ली सल्तनत की राजधानी (1327-1334), और बाद में अहमदनगर सल्तनत की एक माध्यमिक राजधानी (1499-1636)।
महाराष्ट्र राज्य में स्थित इस दुर्जेय पहाड़ी किले का निर्माण, औरंगाबाद की प्रसिद्ध एलोरा की गुफ़ाओं के पास हुआ था। इस किले का निर्माण यादव राजा भिल्लम पंचम ने 11वीं शताब्दी ईस्वी में करवाया था। वर्तमान में यह किला जहाँ स्थित है, वह स्थान पहले देवगिरि के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है, ‘‘देवताओं की पहाड़ी’’। किले के आसपास बसा शहर भी समय के साथ इसी नाम से जाना जाने लगा। ‘‘देवगिरि’’, इस जगह का सटीक नाम है, क्योंकि इस पहाड़ी के चारों ओर जैन, बुद्ध, और हिंदू देवताओं के मंदिर थे।

सुल्तानों के आक्रमणों और लूटमार का शिकार हुआ। ऐसा सबसे पहले, अलाउद्दीन खलजी के शासनकाल में हुआ था। उसके बाद, इस किले पर तुगलकों का राज्य स्थापित हो गया। इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व और समृद्धि के कारण, 14वीं शताब्दी ईस्वी में मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से बदलकर, देवगिरि स्थानांतरित की थी। उन्होंने इस शहर का नाम बदलकर दौलताबाद रखा था, जिसका अर्थ है, ‘‘समृद्धि का गढ़’’। लगभग एक दशक तक, दौलताबाद उनकी राजधानी बना रहा। हालाँकि, यह महत्वाकांक्षी योजना उनकी कल्पना के अनुसार नहीं चल पाई। इस स्थानांतरण के बाद, साम्राज्य की पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी सीमाओं में अशांति फैलने लगी। स्थिति और भी बिगड़ने लगी, जब दौलताबाद क्षेत्र में एक गंभीर जल-संकट पैदा हो गया। अंततः, सुल्तान को अपनी राजधानी वापिस दिल्ली स्थानांतरित करनी पड़ी। इस स्थानांतरण की विफलता और उनकी प्रजा के कष्टदाई अनुभव के कारण, सुल्तान को ‘पागल राजा’ की उपाधि मिल गई।
कई सरदारों ने मुहम्मद बिन तुगलक के खिलाफ़ विद्रोह छेड़ दिए थे, जिनके अंत में, हसन गंगू के नेतृत्व में, दौलताबाद पर बहमनी शासकों का अधिकार स्थापित हो गया। 1499 ईस्वी तक बहमनी राज्य के पतन के बाद, अहमदनगर के निज़ाम शाहियों ने दौलताबाद पर कब्ज़ा करके इसे अपना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र बना लिया। 1633 ईस्वी में चार महीनों तक चली घेराबंदी के बाद, दौलताबाद पर मुगलों ने कब्ज़ा कर लिया। बल्कि औरंगज़ेब ने बीजापुर और गोलकुंडा के विरुद्ध अपने अभियान, दौलताबाद से ही चलाए थे। 1724 ईस्वी में हैदराबाद के निज़ामों के कब्ज़े से पहले, यहाँ थोड़े समय के लिए मराठों का शासन भी रहा। आज़ादी के बाद, यह किला भारत सरकार के नियंत्रण में आ गया।

https://youtu.be/W4g-kLcU12o?si=RlXzHGlCXDurVnxd

6वीं शताब्दी ई. के आसपास, देवगिरी पश्चिमी और दक्षिणी भारत की ओर जाने वाले कारवां मार्गों के साथ, वर्तमान औरंगाबाद के...

PART2-एलोरा या एल्लोरा एक पुरातात्विक स्थल है, जो भारत में औरंगाबाद, महाराष्ट्र से 30 कि॰मि॰ की दूरी पर स्थित है। इन्हें...
23/03/2025

PART2-

एलोरा या एल्लोरा एक पुरातात्विक स्थल है, जो भारत में औरंगाबाद, महाराष्ट्र से 30 कि॰मि॰ की दूरी पर स्थित है। इन्हें राष्ट्रकूट वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था। अपनी स्मारक गुफाओं के लिए प्रसिद्ध, एलोरा युनेस्को द्वारा घोषित एक विश्व धरोहर स्थल है।
भव्य पुरातात्विक जगह जहां छठी से दसवीं सदी तक के धार्मिक स्मारक हैं. ये स्मारक चट्टानों को काटकर बनाए गए हैं।


एलोरा के 34 मठ और मंदिर छत्रपती संभाजीनगर के निकट 2 कि॰मि॰ के क्षेत्र में फैले हैं, इन्हें ऊँची बेसाल्ट की खड़ी चट्टा....

एलोरा या एल्लोरा एक पुरातात्विक स्थल है, जो भारत में औरंगाबाद, महाराष्ट्र से 30 कि॰मि॰ की दूरी पर स्थित है। इन्हें राष्ट...
22/03/2025

एलोरा या एल्लोरा एक पुरातात्विक स्थल है, जो भारत में औरंगाबाद, महाराष्ट्र से 30 कि॰मि॰ की दूरी पर स्थित है। इन्हें राष्ट्रकूट वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था। अपनी स्मारक गुफाओं के लिए प्रसिद्ध, एलोरा युनेस्को द्वारा घोषित एक विश्व धरोहर स्थल है।
भव्य पुरातात्विक जगह जहां छठी से दसवीं सदी तक के धार्मिक स्मारक हैं. ये स्मारक चट्टानों को काटकर बनाए गए हैं।



The Ajanta Caves are 30 rock-cut Buddhist cave monuments dating from the second century BCE to about 480 CE in Aurangaba...
22/03/2025

The Ajanta Caves are 30 rock-cut Buddhist cave monuments dating from the second century BCE to about 480 CE in Aurangabad district of Maharashtra state in India. Ajanta Caves are a UNESCO World Heritage Site. Universally regarded as masterpieces of Buddhist religious art, the caves include paintings and rock-cut sculptures described as among the finest surviving examples of ancient Indian art, particularly expressive paintings that present emotions through gesture, pose and form.
The caves were built in two phases, the first starting around the second century BCE and the second occurring from 400 to 650 CE, according to older accounts, or in a brief period of 460–480 CE according to later scholarship.

The Ajanta Caves constitute ancient monasteries (Viharas) and worship-halls (Chaityas) of different Buddhist traditions carved into a 75-metre (246 ft) wall of rock.The caves also present paintings depicting the past lives and rebirths of the Buddha, pictorial tales from Aryasura's Jatakamala, and rock-cut sculptures of Buddhist deities.

The Ajanta Caves are 30 rock-cut Buddhist cave monuments dating from the second century BCE to about 480 CE in Aurangabad district of Maharashtra state in In...

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