24/08/2026
काफी समय पहले एक जान-पहचान वाले ने मुझसे कुछ पैसे उधार माँगे।
मैंने दे दिए।
उसने कहा था—
“भाई, 30 दिन में वापस कर दूँगा।”
मैंने भी सोचा, ठीक है। अपना ही आदमी है।
उधार दिया, सही किया। लेकिन हाँ, एक गलती जरूर कर दी मैंने।
पैसे देने के बाद मैंने एक जगह लिख लिया कि कितने दिए हैं और कब वापस करने हैं। 😂
30 दिन पूरे हुए।
मैंने बड़े प्यार से पूछा—
“भाई, वो पैसे…”
“हाँ हाँ, बिल्कुल। बस थोड़ा सा टाइम दे दो, जल्दी कर दूँगा।”
मैंने कहा—“ठीक है।”
कुछ दिन बाद फिर पूछा।
फिर वही—
“बस अगले हफ्ते।”
अगला हफ्ता आया।
फिर पूछा।
“यार, अभी थोड़ा अटक गया है… अगले कुछ दिन में।”
फिर कुछ दिन बाद—
“भाई, कर दूँगा। टेंशन मत लो।”
तीन-चार बार ऐसा हुआ।
और हर बार मैं पैसे माँगने से पहले सोचता था—
यार, उसे कहीं ऐसा न लगे कि मैं पैसे के पीछे पड़ गया हूँ।
भारत में उधार की साइकोलॉजी सबसे अजीब है।
जो पैसे लेता है, उस समय यही सोचकर लेता है कि थोड़े समय में वापस कर दूँगा। और जो देता है, वो भी यही सोचकर देता है कि वापस तो आ ही जाएंगे, उसकी हेल्प हो जाएगी।
लेकिन कुछ समय बाद दोनों एक अजीब situation में फँस जाते हैं।
पैसे लेने वाला genuinely परेशान होता होगा, इसलिए वापस नहीं दे पाता। और पैसा देने वाला पैसे माँगते-माँगते खुद awkward हो जाता है।
फिर मैंने सोचा—
अब मैं फोन करके नहीं माँगूँगा।
अपना पैसा माँगना बुरा लगता है। उसको मैसेज करूँगा। कम से कम लिखित में रहेगा, तो उसके रिकॉर्ड में भी रहेगा, जैसे मेरी डायरी में है। शायद इससे मेरा काम आसान हो जाए।
लेकिन माँगने और टालने का सिलसिला अब मैसेज पर चलने लगा।
समय तो बचता था, लेकिन “अभी वापस नहीं मिल पाएगा” वाला संदेश औने-पौने टाइम पर आने लगा।
लेकिन यहाँ भी एक मजेदार बात है, जिसके ऊपर पूरा बैंकिंग सिस्टम टिका हुआ है।
उधार लेने वाला अक्सर अपने परिचित से इसलिए उधार लेता है कि कम से कम ब्याज तो नहीं देना पड़ेगा। और उधार देने वाला इसलिए देता है कि अपने आदमी की मदद हो जाएगी।
लेकिन जब ब्याज नहीं होता, तो वहाँ पर एक दूसरी चीज पैदा हो जाती है—“obligation.”
और उस obligation का हिसाब किसी EMI की तरह नहीं चलता।
वहाँ कोई fixed date नहीं होती।
बस एक आदमी इंतजार करता रहता है और दूसरा कहता रहता है—“बस थोड़ा और…”
इसीलिए बैंकिंग सिस्टम सफल है। वो CIBIL score के नाम पर ये भाँप लेता है कि आप चुका पाएँगे या नहीं।
दूसरे, वो EMI के नाम पर थोड़ा-थोड़ा ब्याज और मूलधन भी काटता जाता है।
बहुत बार तो लोग EMI चुकाने के लिए उधार माँगते हैं और इसीलिए पैसा लौटा नहीं पाते, क्योंकि अगले महीने फिर से EMI आ जाती है।
तो अब मेरे “आसामी” ने 4 महीने और निकाल दिए, टाल-मटोल करते हुए।
फिर एक दिन मैंने देखा कि उसने नई गाड़ी खरीद ली।
पहले तो मन में थोड़ा हँसी आई।
फिर सोचा— चलो, अच्छी बात है। आदमी तरक्की कर रहा है।
और फिर एक अजीब-सी खुशी भी हुई।
सोचा— “चलो… उसकी इस गाड़ी में मेरा भी थोड़ा-सा contribution तो है।” 😂
आखिर कुछ पैसे मेरे भी तो लगे हैं।
हो सकता है गाड़ी पूरी मेरी वजह से नहीं आई हो, लेकिन अगर मेरे पैसे उस व्यक्ति के खराब समय में काम आए थे, तो भला है कि आज वो गाड़ी ले पाया।
मेरा पैसा मेरे पास होता, तो शायद पड़ा रहता। खराब समय पर उसके काम आया, तो अपनी तरफ से मैंने भी उसकी progress में थोड़ा हिस्सा डाला ही है।
बस फर्क इतना है कि गाड़ी उसके घर में खड़ी है, और मेरा contribution मेरी डायरी में ही है। 😂 लेकिन ये बात शायद वो भी नहीं समझता।
कलियुग में इतनी भलाई बची थी कि गाड़ी की मिठाई खाने को मिली, भाभीजी से।
गाड़ी देखने उसके घर गया, तो वो सामने भी पड़ा।
लेकिन मेरे मुँह से सिर्फ निकला—
“बहुत बढ़िया।”
फिर एक दिन हिम्मत करके साफ बोल दिया—
“भाई, अगर possible हो तो मेरे पैसे कर दो।”
इस बार जवाब आया— “हाँ भाई, बिल्कुल। अगले महीने पक्का।”
अब मुझे समझ आ चुका था कि “पक्का” का मतलब भी सिर्फ भावनात्मक आश्वासन है।
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लेकिन मेरी कहानी का अच्छा हिस्सा अभी बाकी है।
उसने मुझसे काफी ज्यादा पैसे माँगे थे। लेकिन तब मैंने सोचा कि इतना बड़ा amount देना ठीक नहीं होगा।
इसलिए मैंने उसको पूरे पैसे न देकर कम पैसे ही दिए।
इसलिए आज थोड़ा पैसा फँसा हुआ है।
शायद वापस आ जाएगा।
शायद नहीं भी आए।
लेकिन एक बात पर अब संतोष है—"कम दिया था।"
क्योंकि अगर उसकी पूरी demand पूरी कर दी होती, तो आज मैं पैसे के साथ-साथ अपनी मूर्खता का भी बड़ा हिसाब कर रहा होता।
अब इतने समय बाद मैंने भी इस पूरे episode से एक बात सीख ली है।
उधार देना बुरा नहीं है।
किसी की मदद करना भी बुरा नहीं है।
लेकिन उधार देते समय एक बात जरूर सोचनी चाहिए—
अगर ये पैसा वापस नहीं आया, तो क्या मैं इसे बिना अपनी नींद खराब किए स्वीकार कर पाऊँगा?
और अपने परिचित से सम्बन्ध खराब तो नहीं होंगे ना?
उस समय मुझे लगा था, कि मैं कम पैसे देकर सही नहीं कर रहा हूँ।
लेकिन मैंने कम नुकसान की व्यवस्था पहले ही कर ली थी।
"पैसे और रिलेशन—दोनों के कम नुकसान की।"
साथ ही, अब दोबारा पैसे नहीं देने पड़ेंगे।
आखिर किस मुँह से माँगेगा।
मुझे जो इतना झिला लिया है। 😂
तो फिर जिंदगी की सबसे अच्छी financial planning और relationship planning यही होती है—
"गलती करो, तो पूरी क्षमता से मत करो। 😄
पैसा उतना ही लगाओ, जितना डूबे तो जेब संभाल ले… और रिश्ता उतना ही आज़माओ, जितना टूटे तो दिल संभाल ले।" 😂
अगर आपके पैसे भी “अगले महीने पक्का” में अटके हुए हैं, तो ये पोस्ट उस तक जरूर पहुँचाइए। 😂
Jahajwalebhaiya Seafarer Sandeep Mahakal
#भाईअगलेमहीनेपक्का