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"परं वैभवं नेतुमेतत?

500 वर्षो से 100 करोड़ हिन्दुओ की तपस्या...लाखो हिन्दुओ का बलिदान... जिसके बाद आज होगया है भव्य मंदिर निर्माण।अयोध्या मे...
22/01/2024

500 वर्षो से 100 करोड़ हिन्दुओ की तपस्या...
लाखो हिन्दुओ का बलिदान...
जिसके बाद आज होगया है भव्य मंदिर निर्माण।

अयोध्या में श्री राम लला के प्राण प्रतिष्ठा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

जय श्री राम 🚩

The Kolkata airport is 99 years old. Netaji Bose landed here in 1938 itself. It was among the busiest airports in the wh...
13/09/2023

The Kolkata airport is 99 years old. Netaji Bose landed here in 1938 itself.

It was among the busiest airports in the whole of Asia for a long time. Clearly within India.

Today, it is not even among the five busiest airports in India. How did its importance decline so rapidly?

Post - Kiran KS

01/09/2023

India achieves another milestone.

The first largest indigenous 700 MWe Kakrapar Nuclear Power Plant Unit-3 in Gujarat starts operations at full capacity.

Congratulations to our scientists and engineers.


Everything is Possible in Politics......And they say BJP plays politics of Vote BankBut Aayega Toh Modi hi......
01/09/2023

Everything is Possible in Politics......

And they say BJP plays politics of Vote Bank

But Aayega Toh Modi hi......

शुभम करोति कल्याणम, आरोग्यम धन संपदा,शत्रु-बुद्धि विनाशाय: दीप: ज्योति नमोस्तुते।अंधकार  पर प्रकाश के विजय पर्व और ख़ुशि...
24/10/2022

शुभम करोति कल्याणम, आरोग्यम धन संपदा,
शत्रु-बुद्धि विनाशाय: दीप: ज्योति नमोस्तुते।

अंधकार पर प्रकाश के विजय पर्व और ख़ुशियों के महापर्व दीपावली के पावन त्योहार की आप सभी को बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ। हम सबके जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का समावेश हो।

जय जय श्री राम

🪔🚩🕉️🚩🪔🙏🏻

10/08/2022

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामंगले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥१॥

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्रांगभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम्
सुशीलं जगद् येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत् कण्टकाकीर्णमार्गम्
स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्॥२॥

समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम्
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥३॥

॥भारत माता की जय॥ा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की उसी क्...
13/07/2022

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की उसी क्रम में आगे बढ़ते हुए भगवा ध्वज को गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया।

इसके पीछे मूल भाव यह था कि व्यक्ति पतित हो सकता है पर विचार और प्रतीक नहीं। विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन गुरु रूप में इसी भगवा ध्वज को नमन करता है।

भारतभूमि के कण-कण में चैतन्य स्पंदन विद्यमान है। पर्वों, त्योहारों और संस्कारों की जीवंत परम्पराएं इसको प्राणवान बनाती हैं। तत्वदर्शी ऋषियों की इस जागृत धरा का ऐसा ही एक पावन पर्व है गुरु पूर्णिमा।

हमारे यहां ‘अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरं...तस्मै श्री गुरुवे नम:’ कह कर गुरु की अभ्यर्थना एक चिरंतन सत्ता के रूप में की गई है। भारत की सनातन संस्कृति में गुरु को परम भाव माना गया है जो कभी नष्ट नहीं हो सकता, इसीलिए गुरु को व्यक्ति नहीं अपितु विचार की संज्ञा दी गई है।

इसी दिव्य भाव ने हमारे राष्ट्र को जगद्गुरु की पदवी से विभूषित किया। गुरु को नमन का ही पावन पर्व है गुरु पूर्णिमा (आषाढ़ पूर्णिमा)।

भगवाध्वज त्याग, समर्पण का प्रतीक है। स्वयं जलते हुए सारे विश्व को प्रकाश देने वाले सूर्य के रंग का प्रतीक है। संपूर्ण जीवों के शाश्वत सुख के लिए समर्पण करने वाले साधु, संत भगवा वस्त्र ही पहनते हैं, इसलिए भगवा, केसरिया त्याग का प्रतीक है। अपने राष्ट्र जीवन के, मानव जीवन के इतिहास का साक्षी यह ध्वज है। यह शाश्वत है, अनंत है, चिरंतन है।

गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

!! जय श्री राम!!
10/04/2022

!! जय श्री राम!!

29/03/2022

केले का पत्ता यानी द्वैत में अद्वैत

जब रावण की सेना को हरा कर और सीता जी को लेकर श्री राम चन्द्र जी वापस अयोध्या पहुंचे - तो वहां उन सब के लौटने की ख़ुशी में एक बड़े भोज का आयोजन हुआ।

वानर सेना के सभी लोग भी आमंत्रित थे - लेकिन बेचारे सब ठहरे वानर ? तो सुग्रीव जी ने उन सब को खूब समझाया - देखो - यहाँ हम अतिथि हैं और अयोध्या के लोग हमारे स्वामी। तुम सब यहाँ खूब अच्छे से व्यवहार करना - हम वानर जाति वालों को लोग शिष्टाचार विहीन न समझें, इस बात का ध्यान रखना।

वानर भी अपनी जाति का मान रखने के लिये तत्पर थे, किन्तु एक वानर आगे आया और हाथ जोड़ कर श्री सुग्रीव से कहने लगा, " प्रभो ! हम प्रयास तो करेंगे कि अपना आचार अच्छा रखें, किन्तु हम ठहरे बन्दर। कहीं भूल चूक भी हो सकती है - तो अयोध्या वासियों के आगे हमारी अच्छी छवि रहे - इसके लिये मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप किसी को हमारा अगुवा बना दें, जो न सिर्फ हमें मार्गदर्शन देता रहे, बल्कि हमारे बैठने आदि का प्रबंध भी सुचारु रूप से चलाये, कि कहीं इसी के लिये वानर आपस में लड़ने भिड़ने लगें तो हमारी छवि धूमिल होगी।"

अब वानरों में सबसे ज्ञानी, व श्री राम के सर्वप्रिय तो हनुमान ही माने जाते थे - तो यह जिम्मेदारी भी उन पर आई।

भोज के दिन श्री हनुमान सबके बैठने वगैरह का इंतज़ाम करते रहे , और सब को ठीक से बैठने के बाद श्री राम के समीप पहुंचे, तो श्री राम ने उन्हें बड़े प्रेम से कहा कि तुम भी मेरे साथ ही बैठ कर भोजन करो। अब हनुमान पशोपेश में आ गये।उनकी योजना में प्रभु के बराबर बैठना तो था ही नहीं - वे तो अपने प्रभु के जीमने के बाद ही प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करने वाले थे। न तो उनके लिये बैठने की जगह ही थी ना ही केले का पत्ता, तो हनुमान बेचारे पशोपेश में थे - ना प्रभु की आज्ञा टाली जाये, ना उनके साथ खाया जाये।

प्रभु तो भक्त के मन की बात जानते हैं । तो वे जान गये कि मेरे हनुमान के लिये केले का पत्ता नहीं है , ना स्थान है। उन्होंने अपनी कृपा से अपने से लगता हनुमान के बैठने जितना स्थान बढ़ा दिया (जिन्होंने इतने बड़े संसार की रचना की हो उन्होंने ज़रा से और स्थान की रचना कर दी)। लेकिन प्रभु ने एक और केले का पत्ता नहीं बनाया।

उन्होंने कहा " हे मेरे प्रिय हनुमान। यूं मेरे साथ मेरे ही केले के पत्ते में भोजन करो। क्योंकि भक्त और भगवान एक हैं - तो कोई हनुमान को भी पूजे तो मुझे ही प्राप्त करेगा (यही अद्वैत यानी एकेश्वर वाद है।)।"

इस पर श्री हनुमान जी बोले, "हे प्रभु - आप मुझे कितने ही अपने बराबर बतायें, मैं कभी आप नहीं होऊँगा, ना तो कभी हो सकता हूँ - ना ही होने की अभिलाषा है। (यह है द्वैत, यानी जीव और ब्रह्म के बीच की मर्यादा) - मैं सदा सर्वदा से आपका सेवक हूँ, और रहूँगा - आपके चरणों में ही मेरा स्थान था - और रहेगा।तो मैं आपकी थाल में से खा ही नहीं सकता।"

जब हनुमान जी ने प्रभु के साथ भोजन करने से इनकार कर दिया।तब श्री राम ने अपने सीधे हाथ की मध्यमा अंगुली से केले के पत्ते के मध्य में एक रेखा खींच दी - जिससे वह पत्ता एक भी रहा और दो भी हो गया। एक भाग में प्रभु ने भोजन किया -और दूसरे अर्ध में हनुमान को कराया।तो जीवात्मा और परमात्मा के ऐक्य और द्वैत दोनों के चिन्ह के रूप में केले के पत्ते आज भी एक होते हुए भी दो हैं - और दो होते हुए भी एक है।
यानी द्वैत में अद्वैत। यही सृष्टि की व्यवस्था जो ब्रह्म और जीव के संबंध यानी द्वैत में अद्वैत को दर्शाती है। इसे समझ लिया तो जीवन से उद्धार तय है।

16/03/2022

भारत अनादि काल से है ‘हिन्दू राष्ट्र' : विश्व हिंदू परिषद

  - आरंभ है प्रचंड....यह राष्ट्रवाद की जीत है. एक नया विमर्श गढ़ने जा रहा हैं. आज तक जिस सच को राजनेताओं और मीडिया ने छिप...
13/03/2022

- आरंभ है प्रचंड....

यह राष्ट्रवाद की जीत है. एक नया विमर्श गढ़ने जा रहा हैं. आज तक जिस सच को राजनेताओं और मीडिया ने छिपा कर रखा था, उसे विवेक अग्निहोत्री जी ने ‘द कश्मीर फाईल्स’ के माध्यम से अत्यंत प्रभावी तरीके से सामने लाया है.
‘कश्मीर फाईल्स’ हिट है. जबरदस्त हिट है. जिस–जिस थिएटर में लगी है, वे सभी थिएटर, सभी टॉकीज युवाओं से भरे पड़े हैं. इस देश में पहली बार राष्ट्रीय विचार बेबाक तरीके से स्क्रीन पर आ रहे है. टॉकीज से निकलने वाला लगभग हर एक व्यक्ति कह रहा है, “ये सब तो हमें मालूम ही नहीं था. आज तक किसी ने हमें बताया ही नहीं”.
अनेक विरोधों के कारण ‘कश्मीर फाईल्स’ पूरे देश में मात्र 630 स्क्रीन्स पर ही प्रदर्शित हो पाई है. किन्तु फिर भी इस मूवी का पहले दिन का कलेक्शन है – 4.25 करोड़ रुपये.

09/03/2022

संघ कार्य एक लाख स्थानों तक ले जाने का लक्ष्य – सुनील आंबेकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर जी ने आज पत्रकार परिषद् को सम्बोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का आयोजन इस वर्ष 11 से 13 मार्च, 2022 के बीच गुजरात के कर्णावती में हो रहा है. संघ में अलग अलग प्रकार की बैठकें होती हैं. उनमें सबसे बड़ी एवं निर्णय की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बैठक प्रतिनिधि सभा रहती है. पूर्व में प्रतिनिधि सभा नागपुर में ही होती थी, नागपुर से बाहर पहली बार प्रतिनिधि सभा 1988 में गुजरात के राजकोट में ही हुई थी.

इस बार प्रतिनिधि सभा में १२४८ प्रतिनिधि अपेक्षित हैं. पूजनीय सरसंघचालक जी के मार्गदर्शन में सरकार्यवाह दत्तात्रेय जी होसबाले बैठक का सञ्चालन करेंगे. बैठक में चयनित प्रतिनिधि, प्रान्त संघचालक, प्रान्त कार्यवाह एवं विविध संगठनों के प्रतिनिधि अपेक्षित रहते हैं. इस बार 36 संगठनों के संगठन मंत्री एवं प्रतिनिधि अपेक्षित हैं.

इस बैठक में प्रतिवर्ष के कार्य के बारे में योजना बनायी जाती है तथा गत वर्ष की समीक्षा होती है. सरकार्यवाह संघ कार्य एवं प्रांतों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं. 2025 में संघ की स्थापना को 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं. इस अवसर पर अपने-अपने प्रांतों में जो योजना बनाई गई है, उसका निवेदन एवं चर्चा इस बैठक में होगी. संघ कार्य के संख्यात्मक आंकड़े प्रान्त अनुसार प्रस्तुत किये जाएंगे. संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ कार्य एक लाख स्थानों तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अवसर पर विभिन्न प्रांतों द्वारा जो आयोजन किया गया है, उसकी भी चर्चा इस बैठक में होगी. स्वाधीनता के अनेक ऐसे वीर जिनके बारे में विशेष जानकारी नहीं है, वह जानकारी समाज को देने का प्रयास किया जाएगा. इसके आलावा ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार द्वारा स्व-निर्भरता कैसे पा सकते हैं, इस बारे में भी कई उपक्रम संघ ने प्रारम्भ किये हैं.

संघ समाज में समरसता, पर्यावरण, परिवार प्रबोधन अदि विषयों पर अनेक संगठनों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है. जिसके विषय में बैठक में चर्चा होगी और आगे की दिशा तय की जाएगी.

पत्रकार परिषद् में अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार जी, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख अलोक कुमार जी तथा गुजरात के सह प्रान्त कार्यवाह डॉ. सुनिल भाई बोरिसा उपस्थित रहे. सञ्चालन डॉ. शिरीष काशीकर ने किया.

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National Institute Of Technology
Durgapur
713209

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