15/08/2026
Narendra Modi सरकार की इन 12 सालों की सबसे बड़ी नाकामी ये है कि वो न तो देश में बैठकर प्रोपोगंडा फैलाने वाले योगेंद्र यादव, टिकैत, आरफ़ा खनम, नेहा सिंह राठौर, रविश कुमार, केजरीवाल, संजय सिंह, अखिलेश, कुणाल कामरा, राहुल गांधी, प्रकाश राज और के ढपली गैंग जैसे ग्रीनमियो पर लगाम लगा पाए और न ही विदेश में बैठे जर्मनी की नागरिकता लिए ध्रुव राठी जैसे ग्रीनमी पर लगाम लगा पाएं ।
इनकी नाकामी यह है कि ये सब के सब बिना भय के न सिर्फ सरकार के विरुद्ध प्रोपोगंडा फैलाते है बल्कि देश और देश कि सेना के साथ - साथ सनातन धर्म और संस्कृति के विरुद्ध भी प्रोपोगंडा फैलाते हैं । सरकार इनके ऊपर कार्यवाही तो दूर की बात है, इनका सोशल मिडिया अकाउंट तक नहीं बैन करा पाती । 12 साल सत्ता में रहने के बाद भी अगर आज भी सिस्टम उन्हीं विपक्षियों का चल रहा है तो इसे सरकार की नाकामी नहीं तो और क्या कहेंगे !! 🤔
2022 से ही सोशल मिडिया पर मोदी सरकार के समर्थकों और हिंदुत्व के समर्थकों के अकाउंट को चुन - चुन कर किसी न किसी बहाने से रिस्ट्रिक्ट किया गया, पोस्ट डिलीट की गई, उनके प्रोफाइल की रिच घटायी गई । हम सब सैकड़ों बार पीएमओ और मंत्रालय को इसकी सूचना दिए लेकिन सत्ता सुख का आनंद ले रहे मंत्रालय के अधिकारियों और मंत्री के कानों तक जूं तक नहीं रेंगी, परिणाम बीजेपी अकेले बहुमत से दूर हो गई और कानों में रुई ठूंस के सोने का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह हुआ कि एक दिन खुद नरेंद्र मोदी का ही वीडियो Meta ने डिलीट कर दिया । वीडियो वापस इसलिए आ गया क्योंकि प्रधानमंत्री का वीडियो था, आम नागरिक या समर्थक आज भी रिव्यू दे देकर मर जाएगा तब भी उसका पोस्ट वापस मिलने की संभावना केवल 5% हैं । क्या यह इस सरकार की नाकामी नहीं है ?
आपने इन 12 सालों में JNU में कोई बदलाव देखा क्या ? मुझे तो कोई परिवर्तन नहीं दिखा, आपको दिखा हो तो जरूर बताए ! अभी दो दिन पूर्व ही JNU में उमर खालिद के पुस्तक का विमोचन हुआ, देश को टुकड़े करने की इच्छा और दिल्ली दंगा भड़काने वाले उमर खालिद और चिकन नेक को काटकर पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने का इरादा व्यक्त करने वाले शरजील इमाम के रिहाई के लिए नारे लगे और उस मंच पर सभी संभावित देश द्रोही उपस्थित थे । लेकिन आपके ही अधीन कार्य करने वाले JNU प्रशासन ने क्या कार्यवाही किया ? 12 वर्षों में भारत विरोधी नारे लगाने वाले कितने वामपंथी विद्यार्थियों को JNU प्रशासन ने विश्विद्यालय से निकाला ? एक भी नहीं, शायद इसीलिए क्योंकि खुद आपका ही विचार है कि दाँत से जब जीभ कट जाती है तो हम दाँत नहीं तोड़ते क्योंकि दांत भी हमारे ही है । मगर साहब ... किसी दांत में अगर कीड़ा लग जाए तो या तो दांत का विधिवत् ईलाज करना पड़ता है या फिर उसे उखाड़ना पड़ता है ! उसे यूँ ही नहीं छोड़ा जा सकता है अन्यथा उसकी संगत में उसके साथ वाले दाँत में भी कीड़े लग सकते हैं ।12 साल में आप JNU में ऐसा कोई सिस्टम ही डेवलप नहीं कर पाए कि सिर्फ राष्ट्रवादी विचारधारा के विद्यार्थियों की नई खेप ही पहुंचे, प्रोफेसरों के चयन का ऐसा सिस्टम नहीं बना पाए कि ताकि कोई भी नया वामपंथी उसमें प्रोफ़ेसर न बन पाए । 50 लोगो का ढपली गैंग ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, ठाकुरवाद हो बर्बाद का नारा लगाता है और पूरे देश तक वो अपनी बात पहुंचाने में कामयाब हो जाते हैं, आप 500 लोग वहां भारत माता की जय का उद्घोष या सरस्वती पूजन समारोह करके भी कैंपस के बाहर तक खबर पहुंचाने में कामयाब नहीं हो पाते और तथाकथित विश्व का का सबसे बड़ा जैसा छात्र संगठन आपके ही पास हैं और यह हाल तब है जब आप 12 सालों से सत्ता में भी हैं ! यह आपकी सबसे बड़ी नाकामयाबी है !
कटु सत्य यह है कि मोदी सरकार विदेशी शत्रुओं के प्रति जितनी कठोर और तेज हैं, उतनी ही यह घर के अंदर मौजूद देश द्रोहियों पर कार्यवाही में पिलपिली और फिसड्डी । 🤐
अब ये मत कहना कि सुप्रीम कोर्ट या फिर न्यायालय के हस्तक्षेप से कुछ कर नहीं पाते ? क्यों आपके पास बड़े - बड़े वकील नहीं हैं क्या ? जब 12 साल से विपक्ष में होते हुए भी अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल सेटिंग कर सकते है, जजों तक पहुंच और इच्छानुरूप फैसला दिला देते है और आप 12 साल से सत्ता में रहकर भी नहीं कर पा रहे है तो यह आपकी नाकामी नहीं तो और क्या हैं ? यह आपकी नाकामी ही दर्शाता है साहब !
साल 2022 में देशद्रोह के मामले कन्हैया कुमार का चार्जशीट दाखिल हुआ, लेकिन उसी साल 2022 में ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (देशद्रोह कानून) की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करने और इस कानून के तहत सभी कार्यवाहियों को स्थगित रखने के आदेश के बाद, दिल्ली की निचली अदालत ने कन्हैया कुमार के इस ट्रायल पर रोक (Stay) लगा दी थी । आपने अब BNS बना दिया है लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट समीक्षा नहीं कर पाया और तीस्ता सीतलवाड़ जैसो का जमानत सिरी फोर्ट आडिटोरियम में बैठकर जज साहब चुटकी में दे देते है और आप कड़ा विरोध नहीं कर पाते तो यह आपकी नाकामी ही हैं !
वो विपक्ष में रहकर भी मीडिया मैनेज कर लेते है, मीडिया के द्वारा खबरों को दबाने या उठाने को मैनेज कर लेते है और आप सही न्यूज भी प्रसारित नहीं करवा पाते तो यह नाकामी ही हैं, इसके बावजूद भी वो गोदी मीडिया नाम का प्रोपोगंडा फैला नहीं रहे बल्कि स्टैबलिश कर चुके हैं । ये मीडिया मैनेज तक करने में नाकाम है, इसका उदाहरण देखिए । 2026 नीट पेपर लीक में उसका मास्टरमाइंड संतोष जायसवाल (जो कि लालू यादव की पार्टी RJD का राष्ट्रीय सचिव है) की मई 2026 में ही गिरफ्तारी हुई लेकिन मीडिया और मंचों पर सन्नाटा छाया रहा तो ये आपकी नाकामी नहीं तो और क्या हैं?🤔