19/08/2026
मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥
अर्थात: हे दुष्ट (निषाद), तुमने प्रेम मे मग्न क्रौंच पक्षी को मारा है इसीलिए जा तुझे कभी भी प्रतिष्ठा (शांति) प्राप्त नहीं होगी एवं तुझे भी इन्ही की भांति वियोग झेलना होगा।
ब्रह्मा जी द्वारा समझाइए गए श्लोक का अर्थ......
"हे निर्दयी (रावण), चूंकि तुमने देवी सीता को श्रीराम से विलग किया है जो उनसे अथाह प्रेम करती थी, इसी कारण तुम विधि (ब्रह्मा) के वरदानों का लाभ नही उठा पाओगे।"
ये सुनकर महर्षि वाल्मीकि को बड़ा संतोष हुआ किन्तु उनका विषाद पूरी तरह नही मिटा। इस पर ब्रह्म देव ने उन्हें उसी श्लोक का एक और अर्थ बताया जो श्रीराम के दृष्टिकोण से था -
"हे श्रीराम! चूकि आपने काम में डूबे हुए निर्दयी (रावण) का वध किया है अतः आप अनन्त काल तक प्रतिष्ठा को प्राप्त करेगें।"