27/08/2017
महाभारत मे टूर गाइड के बारे मे लिखा है..
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महाभारत के युद्ध के बाद एक बार विश्राम करते हुये अर्जुन ने कृष्ण से प्रश्न किया:
हे माधव ,कलयुग मे जब मनुष्य लोभी व अत्याचारी होगा तब इस संसार का पालन , परोपकार व धर्म का पालन कौन करेगा ! कौन होगा जो इस संसार के प्राणियों को, तीर्थयात्रा, भ्रमण करा कर उसे असीम सुख की प्राप्ति करायेगा!!
कृष्ण ने उत्तर दिया ;
हे आर्य ,मै तुम्हे एक विशेष वर्ग के पुरुषों की कथा सुनाता हूँ ,
"कलयुग मे धन का समुचित व संकलित आदान प्रदान करने वाले , ऋण दायक ,प्रशासक के भिन्न प्रयासों का पालन कर प्रजा की भलाई करने वाले ,बुद्धिमान परोपकारी ,परिश्रमी पुरुष जन्म लेंगे, जो विभिन्न कष्टदायक परिस्तिथियों मे भी बिना अन्न जल के, अपने परिवार का चिंता किये बगैर हर पल, सूर्यास्त से सूर्योदय तक और सूर्योदय से सूर्यास्त तक , अपने परिवार की खुशियाँ, त्यौहारों, छुटियों को नजरअंदाज़ कर, लगातार अनवरत कार्य करते हुए अपने उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन करेंगे..
दूसरों की छुटियाँ, त्यौहार को अविस्मरणीय बनाने क लिय, अथक प्रयास करते हुए उन के जीवन को सुखमय बनाने के लिये अपने कुल, देश से दूरस्थ होकर भी तथा नाना प्राकार के कष्टों को झेलते हुए इस संसार का कल्याण करेंगे..
वे पराक्रमी पुरुष विकट समस्याओं से भयभीत ना होते हुए न्यूनतम वेतन पर परिश्रम करते रहेंगे..
वो भले ही अपने माँ बाप को तीर्थाटन न कराये हो, अपने बच्चे को भले ही सोते हुए बड़ा होते देखा हो, न सोने की वजह से आँखे भले ही जलन दे रही हो, लेकिन अपने आगंतुक महोदय के एक पुकार पे अपना हर काम छोड़ कर ये महापुरुष हर क्षण उन की सेवा में तत्पर रहेगें।
हे तात, ये प्राणी भले ही अपने परिवार की सेवा श्रुसुशा न कर सके मगर अपने आगंतुक,अतिथि की सेवा में एक कमी नहीं छोड़ेंगे!!
उच्चकुलीन, शालीन, ज्ञानवान व विनम्र होने के कारण वे कभी उच्चाधिकारियों व आगंतुक के प्रति आक्रोश नही करेंगे तथा न्यूनतम वेतन मे ही किसी प्रकार निर्वाह करेंगे ।
उच्चाधिकारियों व प्रशासकों द्वारा प्रताडित, अपमानित व दण्डित होने पर भी ये लज्जाहीन होकर अपने कार्यों के निर्वाह मे डटे रहेंगे ।
*हे तात , कालांतर में यही जीवट प्राणी , टूर गाइड कहलायेँगे तथा संसार का कल्याण करेंगे."*
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