Acute mountain sickness -AMS

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दिरांग मठ  अरुणाचल प्रदेश में गये और मोनेस्ट्री न देखी ऐसा भला हो सकता है क्या। भारत में एक से बढ़ कर एक खूबसूरत मोनेस्ट्...
25/03/2023

दिरांग मठ

अरुणाचल प्रदेश में गये और मोनेस्ट्री न देखी ऐसा भला हो सकता है क्या। भारत में एक से बढ़ कर एक खूबसूरत मोनेस्ट्री हैं जैसे की मोनेस्ट्री, तवांग मोनेस्ट्री, टुटिंग मोनेस्ट्री लेकिन दिरांग की मोनेस्ट्री नयी और कालात्मक है एक बार जाना बनता है बॉस

 #मंडाला_टॉप   जब कभी आपको आरुणाचल प्रदेश आने का मौका मिलेगा तो आपमें से 80% लोग सबसे पहले तवांग सर्किट करेंगे। इस सर्कि...
24/03/2023

#मंडाला_टॉप

जब कभी आपको आरुणाचल प्रदेश आने का मौका मिलेगा तो आपमें से 80% लोग सबसे पहले तवांग सर्किट करेंगे। इस सर्किट के दौरान आप दिरांग तो जायेंगे लेकिन हो सकता है आपका मंडाला टॉप छूट जाये।

जब भी आप तवांग सर्किट करें सांगती वैली और मंडाला टॉप बिल्कुल भी न मिस करें। मंडाला पास या मंडाला टॉप बहुत ही कम लोग आते हैं जबकि ये जगह बहुत ही कमाल की है।

ला का मतलब तिब्बत में माउंटेन पास या दर्रा होता है जैसे खरदूंगला, सिंकुला, चांगला, तंगलांगला, परांगला वैसे ही मंडाला।

मंडला टॉप 108 बौद्ध स्तूपों की एक श्रृंखला है जो अरुणाचल प्रदेश में एक पहाड़ की चोटी पर एक चक्र में बनाया गया है। यह 2018 में बनाया गया था इसलिए यह बिल्कुल नया है।

यह भारत में अपनी तरह का पहला है जहां 108 स्तंभों में 'ओम मणि पदमे हम' मंत्र अंकित है।

बौद्ध स्तूप एक धार्मिक स्मारक है जिसे किसी प्रियजन की याद में या बौद्ध धर्म या पवित्र ग्रंथों से संबंधित धार्मिक कलाकृतियों को रखने के लिए बनाया गया है।

हालाँकि आपके मन में एक छवि हो सकती है कि एक स्तूप कैसा दिख सकता है, उदाहरण के लिए, नेपाल या भारत के अन्य हिस्सों की तरह गोल नहीं अरुणाचल प्रदेश में स्तूप काफी अलग हैं।

अरुणाचल प्रदेश में एक स्तूप की सामान्य वास्तुकला चौकोर और लंबी है, जिसे सफेद और लाल रंग से रंगा गया है और इसकी छत पीले रंग की है। उनके अंदर प्रार्थना चक्र या नक्काशियां भी हो सकती हैं या नहीं भी हो सकती हैं। आप उन्हें पश्चिम कामेंग और तवांग के सभी क्षेत्रों में बिखरा हुआ देखेंगे।

ये जगह करीब करीब 10000 फिट में स्तिथ है और वर्ष भर यहाँ का मौसम ठंडा बना रहता है विंटर में यहाँ दबा कर बर्फीबारी होती है। मौसम साफ होने पर यहाँ से गोरिचैन पर्वत का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

तो आप कब आ रहे हैं अरुणाचल.....

 #टुटिंग #हिमालय_की_गोद_में_बसा_एक_खूबसूरत_कस्बाटूटिंग जैसा नाम वैसे ही यहाँ जाने का रास्ता पूरा टुटा पूटा। रास्ता भले ह...
28/01/2023

#टुटिंग

#हिमालय_की_गोद_में_बसा_एक_खूबसूरत_कस्बा

टूटिंग जैसा नाम वैसे ही यहाँ जाने का रास्ता पूरा टुटा पूटा। रास्ता भले ही टुटा पूटा हो लेकिन यहाँ के लोगों के दिल में बहुत जगह है।

अरुणाचल प्रदेश के अपर सियाँग जिले में बसा है टुटिंग।
शांति की चादर ओढे है ये जगह चारों ओर एक सुकून फैला हुआ। सियाँग नदी यानी ब्रह्मपुत्र यहाँ की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है। सियाँग की भयानक आवाज़ यहाँ की शांति में थोड़ा विघ्न जरूर डालती हैं लेकिन कुछ समय बाद ऐसा प्रतीत होता है जैसे सियाँग की आवाज यहाँ के वातावरण में एक अलग शांति बिखेर रही है।

सियाँग नदी के ऊपर बना झूलता हुआ सस्पेंनशन पुल इस जगह की खूबसूरती पर चार चाँद लगाता है। अरुणाचल एक ऐसी जगह है जहाँ आप किसी भी ओर निकल जाइये एक न एक चाइना का बॉर्डर आपको मिल ही जायेगा। वैसे ही टूटिंग से 22 km आगे गेलिंग गाँव है जो की उस तरफ से भारत का आखिरी गाँव है और भारत चाइना का बॉर्डर भी यहाँ से पास ही है।

गेलिंग के पास से ही ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से भारत में प्रवेश करती है। गेलिंग गाँव में एक मोनेस्ट्री भी है। यहाँ से पास में ही नोरबूलिंग गाँव है जहाँ पर देखने के लिए एक मोनेस्ट्री और एक झील भी है।

टुटिंग में आपको अधिकतर लोग बौद्ध धर्म को मानने वाले मिल जाएंगे। टुटिंग में एक बहुत ही सुन्दर मोनेस्ट्री है जहाँ पर एक म्यूजिम और स्कूल भी है।

टुटिंग में भारतीय वायुसेना की एक ALG यानी advance landing ground यानी अग्रिम हवाई पट्टी भी है जो यहाँ की शोभा बढ़ाती है।

टुटिंग में आप सियाँग नदी के किनारे टहल सकते हैं और सियाँग के विकारल रूप को निहार सकते हैं। लोकल लोग इस जगह को सियाँग बीच बोलते हैं और यहाँ पर बहुत पार्टी करते हैं।

टुटिंग में रुकने के लिए गिने चुने 2 होटल हैं। यहाँ एक सर्किट हॉउस भी है लेकिन यहाँ पर रुकने के लिए सबसे बढ़िया है अम्मा होमस्टे।

यहाँ आने का रास्ता बेहद ख़राब है। यहाँ आने का सबसे बढ़िया समय है नवंबर से मार्च।

यहाँ पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले पासीघाट पहुँचना होगा। पासीघाट से पहले दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट पकड़ कर yiongkiong अगले दिन yiongkiong से टुटिंग।

जब भी आप जाये तो अम्मा होमस्टे का नंबर मुझसे ले सकते हैं।

24/01/2023

आवारापन, पनार बुग्याल की ओर

04/01/2023

Solo jungle trek

 #साल_2022_की_घुमक्कड़ी_का_लेखा_जोखासाल 2022 घुमक्कड़ी के हिसाब से बहुत अच्छा रहा इस साल मैंने 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाये। ...
04/01/2023

#साल_2022_की_घुमक्कड़ी_का_लेखा_जोखा

साल 2022 घुमक्कड़ी के हिसाब से बहुत अच्छा रहा इस साल मैंने 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाये।

जनवरी - जनवरी की शुरुआत हुई 36 घंटे की नॉन स्टॉप साइकिलिंग से जिसमें सिर्फ खाने और चाय पीने के लिए रुका गया। असम के तेज़पुर से नागालैंड के वोखा जिले में दोयाग झील तक की ये यात्रा 440 km थी।

फरवरी - इस महीने असम के कनुका विलेज घुमा गया।

मार्च - मार्च का महीना था एडवेंचर का। आज तक की मेरी लाइफ का सबसे बड़ा एडवेंचर इस महीने हुआ। इस महीने होली वाले दिन से ईगल नेस्ट वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की साइकिलिंग राइड करी जो की एक पुराने से टूटे फूटे पहाड़ी रास्तों में में घने जंगलो में थी। जिसमें एक पागल हाथी से सामना भी हुआ लेकिन जान बच गयी।

अप्रैल - अप्रैल में अपनी कार और फैमिली के साथ तवांग, बुमला, माधुरी लेक, जांग वाटरफॉल, दिरांग, सेला पास और बोमडीला का सफर हुआ।

मई - बाबा केदारनाथ जी के कपाट खुलने पर दर्शन हुऐ। ये ट्रेक नंगे पैर किया गया।मई में ही ब्लैक पीक 6387 मीटर पर चढाई करी रिकॉर्ड 5 दिनों में और अपना पहला वर्ड रिकॉड बनाया। बाबा रुद्रनाथ जी के दर्शन भी इस महीने किये।

जून और जुलाई - जून और जुलाई में असम में ही बहुत सारी साइकिल राइड की गयी।

अगस्त - अगस्त में 6111 मीटर का यूनाम पीक का सफलता पूर्वक आरोहण किया गया। इसके ठीक 4 दिन बाद 5974 मीटर के कानमो पीक में भारत का 100 मीटर का झंडा फहराकर अपना दूसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड सेट किया। अगस्त में ही चंद्रताल, हिकीम, चिचम ब्रिज, लांजा, किब्बर और मनाली घुमा गया।

सितम्बर - सितम्बर में गगोत्री, गौमुख, नन्दनवन और वासुकी ताल गया। सतोपंथ पर्वत 7075 मीटर एक्सपीडिशन भी किया लेकिन मौसम ख़राब होने की वजह से कैंप 1 से वापस आना पड़ा।

अक्टूबर - अक्टूबर में अरुणाचल के ज़ीरो म्यूजिक फेस्टिवल में बाबा सहगल के गानों का मजा लिया और ज़ीरो घुमा।

नवंबर - नवंबर में दुनियाँ के नदी द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा आइलैंड तीसरी बार गया और माजुली म्यूजिक फेस्टिवल में लकी अली को तस्सली से सुना।

दिसंबर - दिसंबर सबसे बिजी रहा अगस्त और सितम्बर की तरह ही। इस महीने पहले नागालैंड के कोहिमा के पास हॉर्नीबिल फेस्टिवल देखा उसके बाद नागालैंड की दूसरी सबसे ऊँची चोटी जाफु पीक का ट्रेक किया।

उसके कुछ दिन बाद अरुणाचल और देश के सबसे ईस्टर्न पार्ट यानी किबिथु की साइकिलिंग की। इस राइड के दौरान जोराहट, शिवसागर,भूपेंद्र हजारिका ब्रिज, बोगी बिल ब्रिज, वाक्रो, तेजू, हयुलिंग, ग्लो लेक ट्रेक, दोंग ट्रेक, वालोंग, किबिथु,चाइना बॉर्डर, काहो भारत का पहला गाँव ये सब देखा।

इसके बाद मणिपुर में इम्फाल, मोरेह भारत म्यांमार बॉर्डर, लोकटक लेक, किबुल लंजो नेशनल पार्क घुमा।

कुछ दिन बाद फिर भारत और चाइना के एक और बॉर्डर की ओर गया। अरुणाचल में टुटिंग और गेलिंग की ओर।

आशा करता हूँ 2023 में और ज्यादा साइकिलिंग, पर्वतारोहण और घुमक्कड़ी होगी।

इस साल सबसे अच्छा जो हुआ वो हुआ महाराज Anuj Pandey से मुलाक़ात

  #भाग_5Salleri to phakding आज के दिन की शुरुवात हुई 6 बज कर 30 मिनट पर एक और सफर से आज का सफर था salleri से bupsa तक का...
11/11/2022



#भाग_5

Salleri to phakding

आज के दिन की शुरुवात हुई 6 बज कर 30 मिनट पर एक और सफर से आज का सफर था salleri से bupsa तक का. लगातार 3 दिनों से सफर कर के शरीर पूरा थक गया था और आज का रास्ता भी पूरा कच्चा था. Salleri से bupsa केवल 60 km है लेकिन वहाँ तक जाने में 7 घंटे लगते हैं. कुछ समय बाद ही मन को हर्षित कर लेने वाले नजारे हमारे आँखों के सामने थे. एक छोटे से गाँव से mt दूध कुंड का बहुत ही आकर्षण नज़ारा दिखाई दे रहा था.

हिलते दुलते ऊंचे ऊँचे पहाड़ों के बीच से गाड़ी चल रही थी. होने को मैं भी एक पहाड़ी हूँ लेकिन ऐसे पहाड़ और उन पहाड़ों में बनी ऐसी रोड मैंने देखी नहीं थी पहले कभी. इस रोड पर केवल 4 wheel drive गाड़ी ही चलती है.

9 बजे हम कैगते पहुंचे वहाँ पर हमने breakfast किया. वहाँ भैस का मीट बन रहा था जो थूप्पा में डाला जा रहा था. हमने बोला 4 वेज नूडल्स लिए जिनका दाम हुआ 320 नेपाली रुपया
Breakfast कर के हम चल दिए. अडेरी में पिछले साल एक पुल बन रहा था ये बात मुझे Giri Gurpreet Sidhu ने बतायी जिसकी वजह से salleri से गाड़ी वाला आपको दूध कोसी नदी के इस तरफ छोड़ देगा और नदी क्रॉस करने के बाद दूसरी तरह से आपको bupsa के लिए गाड़ी मिल जाएगी. लेकिन अब वो पुल बन चुका है और अब पूरी गाड़ी bupsa तक जाती है.
गाड़ी से ही हमने दूसरे सहयात्रियों के साथ bupsa में 4 veg लंच का ऑर्डर दे दिया. हम 2 बजे bupsa पहुच चुके थे. वहाँ हमने लंच किया जब पैसे पूछे तो दुकानदार बोली 1600 रुपये हो गया लेकिन हमको तो गाड़ी में लोगों ने बोला था 250 रुपया पर प्लेट. जब हमने साथ वाले यात्री से बोला तब उन्होंने दुकान वाली से बोलकर पैसे कम कराये. वो हमको बाहर से आया देख कर ज्यादा रुपया लेना चाहती थी लेकिन हमने उसको 1000 नेपाली रुपया ही दिया

करीब 2 बज कर 20 मिनट पर हमने ट्रेक करना शुरू किया. जैसा की मैंने गूगल से पता किया था की bupsa से phakding की दूरी 15 km है तो मैंने idea लगाया की हम 8 बजे तक तक phakding पहुंच जाएंगे.

हमारे साथ एक नेपाली दंपति भी थे जिनका होटल phakding से कुछ आगे manjo में था उन्होंने हमको ऑफर दिया की हम उनके होटल में रुक जाए वो हमसे रूम के रुपए नहीं लेंगे सिर्फ खाने के लेंगे. ये बात हमको अच्छी लगी हमने बोला पहले phakding चलते हैं फिर विचार करेंगे.
ट्रेक सुदर सुंदर गाँवों से होकर गुजर रहा था. हम लोग चले जा रहे थे. कुछ समय बाद धीरे धीरे थकान होना शुरू हो गई 3 दिन से सफर कर रहे थे और आज ट्रेक भी शुरू कर दिया था. अब अंधेरा भी हो गया था हम लोगों ने अपनी अपनी नाइट टॉर्च निकाल ली थी. तनु को बैग उठाने में थोड़ा दिक्कत आ रही थी और स्पीड भी कम हो रही थी तो उमा ने तनु का बैग भी अपने बैग के उप्पर रख लिया.
रास्ते में जिस किसी से भी पूछो phakding के बारे में कोई बोलता है 5 घंटे लगेंगे कोई बोलता है 3 घंटे लगेंगे एक ने बताया 8 घटे लगेंगे. हम लोगों ने सोच लिया था आज कम से कम phakding तक तो जरूर जाएंगे.
साथ में चलने वाले जोड़े ने बोला आप आज phakding में ही रुक जाना वहाँ पर उनके भाई का होटल है जहां वो खाने का ही चार्ज लेगा रहने का नहीं.

चलते चलते सब की हालत खराब हो गई थी और अब उमा से बैग भी नहीं उठाया जा रहा था फिर से तनु का बैग तनु को दे दिया.
रात को 1130 पर हम लोग phakding के पास आ गए तब हमने साथ वालों से पूछा कितने दूर है होटल उन्होंने बोला बस 20 मिनट. 15 मिनट और चलने के बाद फिर पूछा और जबाव फिर वो ही मिला 20 मिनट
अब हम phakding भी क्रॉस कर चुके थे फिर पूछा अब कितनी दूर है तब उसने थोड़ी दूर लाइट जलती हुई दिखाई और बताया वहाँ से 5 मिनट बस अब हमने उसको मना कर दिया चलने को. समय रात के 12 से भी ज्यादा हो गया था.

अब वो अदानी भड़क गया की मैंने आप लोगों के लिए खाना बनवा दिया है अब आपको चलना ही पड़ेगा. हमने भी बोला पिछले 1 घंटे से 20 मिनट बोल बोल कर इतना चला दिया है हम अब नहीं चलेंगे. हमने पास में ही 500-500 NPR के 2 रूम ले लिए और खाने का बिल्कुल भी मन नहीं था थोड़ा बिस्कुट और नमकीन खा कर सो गये
Phakding की दूरी जो नेट में 15 km दिखाता है वो मेरी घड़ी ने 24 km बतायी.

भाग 4 👇👇👇👇

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 भाग 4 #काकडभिट्टा_से_सल्लेरी सुबह सुबह 4 बजे बस में बैठ गये सोचा था शाम को 5 बजे तक salleri पहुच जाएंगे. लेकिन ऐसा हुआ ...
07/11/2022



भाग 4

#काकडभिट्टा_से_सल्लेरी

सुबह सुबह 4 बजे बस में बैठ गये सोचा था शाम को 5 बजे तक salleri पहुच जाएंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

काकडभिट्टा से मिरचये तक का रास्ता बहुत अच्छा था. लेकिन उसके बाद रास्ता पहाड़ वाला था. रोड के नाम पर बस धूल ही धूल थी. रास्ता बहुत ही खराब था. जैसे ही पहाड़ का रास्ता शुरू हुआ पूरी बस हिलना शुरू हो गई.
अब बस बहुत ही हल्के चल रही थी. पूरे रास्ते में धूल ही धूल उड़ रही थी. ओखलडुंग्गा तक रोड की हालत बहुत ही खराब थी.ओखलडुंग्गा पहुंचते पहुचते बस का टायर पंचर हो गया. जिसको चेंज करने में बहुत समय लग गया. उस से आगे रोड पक्की थी लेकिन बहुत ही पतली थी. ये सफर भी हमारा किसी एडवेंचर्स से कम नहीं था. बस ड्राइवर ने पूरे रास्ते भर मस्त मस्त नेपाली गाने लगाये. लास्ट में लोलीपॉप लागेलु लगा कर हम लोगों को अपने देश में ही होने का एहसास कराया.
रात को 8 बज कर 40 मिनट में हम salleri पहुच चुके थे. जहां हमारा दोस्त Ritesh Singh Uma काठमांडू से 2 घंटे पहले ही आ चुका था और उसने हम लोगों के लिए होटल रूम ले लिया था. रूम का किराया 500 NPR पर रूम. हर रूम में 2 बेड थे और खाने का 200 NPR पर हेड. Wi fi की सुविधा भी फ्री थी. हमने रात को ही बुपसा के लिए 1700 NPR पर हेड गाड़ी की बात कर ली थी. फिर हम सो गये.

भाग 3 👇👇👇👇

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=4153933561291912&id=100000259268098

 ार्ट_3EVEREST BASE CAMP जिसके नाम के साथ ही एवरेस्ट जुड़ा हुआ हो उसकी चमक ही कुछ छटा ही निराली है. जितना आसान ये ट्रेक ...
03/11/2022

ार्ट_3

EVEREST BASE CAMP जिसके नाम के साथ ही एवरेस्ट जुड़ा हुआ हो उसकी चमक ही कुछ छटा ही निराली है. जितना आसान ये ट्रेक यू ट्यूब में नजर आता है दरसल ये उसके उल्टा है हाथी के दांत दिखाने के कुछ और खाने के कुछ और. नामचे से पहले से ही आपको हाई अल्टीटूयड में रहना है और वापस नामचे आने में आपको कम से कम 6 दिन लग जाएंगे तो आपना पहला ट्रेक EBC करने का कभी न सोचें वो बात और थी की इस बार मेरे साथ 2 ट्रेकर ऐसे थे जिनका ये जिन्दगी का पहला ट्रेक था.

जितने भी छोटे मोटे ट्रेकर होते हैं या फिर बड़े ट्रेकर सभी का सपना होता है जिंदगी में कम से कम एक बार एवरेस्ट बेस कैम्प करने और कालापत्थर से एवरेस्ट को बिल्कुल अपने करीब से देखने का. सभी की तरह मेरा भी था और अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए 13 मार्च 2021 को मैं अपने घर से सुबह सुबह 3 बजे तरुण के साथ चल दिया

प्लान तो काफी दिनों से था लेकिन कुछ फिक्स नहीं हो पा रहा था इसलिए हमने ट्रेन में कोई reservation नहीं करा रखा था. सुबह 3.45 वाली dibrugarh राजधानी में हम लोग बैठ गये और सोचा अगर tt आयेगा तो उस से टिकट बनवा लेंगे लेकिन किस्मत NJP तक कोई टिकट चेक करने आया ही नहीं

12 बजे हम लोग njp पहुंच चुके थे. जैसे ही स्टेशन से बाहर निकले हमारे रूकसैक को देख कर लोग समझ गए की ये लोग नेपाल वाले ट्रेकर लग रहे हैं. कोई बोला चलो आपको नेपाल बॉर्डर छोड़ देते हैं सिर्फ 1000 रुपये लगेंगे कोई बोला 200 रुपये पर सीट लगेगा. मैं बोला भाई तेज़पुर से यहाँ तक तो फ्री में आ गए हैं अब यहां से भी कम पैसे में जायेगे. और हमने वो ही लिया हो हम हमेशा करते हैं. स्टेशन से बाहर निकल के सिलीगुड़ी के लिए शेयर ऑटो लिया 20-20 रुपये मे और सिलीगुड़ी से पानी की टंकी वाली बस पकड़ ली सिर्फ 40-40 रुपये में भैया जब पैसे बचेंगे तब ही तो सस्ता ट्रेक हो पायेगा और अगले ट्रेक के लिए पैसे जमा होंगे फॅमिली भी तो पालनी है मुझे

थोड़े देर में तनु शर्मा भी बागडोगरा एयर पोर्ट पर लैंड कर चुकी थी. उसको गाइड कर दिया कैसे पानी की टंकी नेपाल बॉर्डर पर पहुंचना है. बहुत जल्द ही हम तीनों साथ थे अब बॉर्डर क्रॉस करना था.

जैसे ही पुल पार कर रहे थे तो एक नेपाली मिला बोला कहाँ जाना है तो मैंने बोला दाज्यू सल्लेरी जाना है वो बोला ये कहाँ है मैंने बोला फाफलू एयर पोर्ट तब भी उसको कुछ समझ नहीं आया फिर काम आयी मेरी इतने दिनों की मेहनत जो मैंने इस ट्रेक को प्लान करने के लिए की थी. गूगल,गुरप्रीत और बहुत जगह से जानकारी इकट्ठा करी थी. मैंने बोला ओखलडुंग्गा के लिए बस मिलेगी सोलुखम्बू वाली तो वो बोला हाँ हाँ एक बस है चलो में दिखाता हूँ. अब आपको ये बता दूँ salleri को कोई नहीं जानता अगर आपको salleri जाना है तो सोलु बोलना पड़ेगा. भारत के सारे नेपाल बॉर्डर के लिए ओखलडुंग्गा तक बस चलती है जो सोलु से 50 km पहले है और सोलु तक भी बस मिलने के 60 % चांस हैं.

हम उसके पीछे चल दिए फिर उसने पूछा corona negative रिपोर्ट है क्या nt pcr वाली मैंने बोला वो तो नहीं है तब वो बोला पुल क्रॉस करने के बाद पुलिस वाला मांगेगा उसको दिखानी पड़ेगी नहीं तो जाने नहीं देगा. मैंने कहा अब कैसे होगा तब वो बोला उसको पैसे देने होंगे मैंने बोला कितना वो बोला 500. वो बोला वहाँ पर मत देना आप मैं उसको बोल दूँगा आप साइड में मुझे दे देना मैं उसको दे दूँगा.

जैसे ही हम पुलिस वाले के पास से निकल रहे थे तो मैंने देखा कोई भी तो उसके पास नहीं जा रहा है सब सीधे ही निकल रहे हैं. लेकिन वो नेपाली हमको ज़बर्दस्ती उस पुलिस वाले के पास ले गया. पुलिस वाले ने हमसे पूछा कहाँ से आ रहे हो और कहां जा रहे हो और अपने रजिस्टर में एंट्री की. फिर नेपाली उस से अपनी नेपाली भाषा में बोला इनके पास nt pcr test की रिपोर्ट नहीं है सिर्फ लड़की के पास है फिर पुलिस वाला Ok बोला और हमसे बोला जाओ. पुलिस वाले और नेपाली के लिए पैसों की कोई बात नहीं हुई फिर हम चल दिए थोड़ा आगे जा कर वो बोला देखा मैंने उस से बात कर के आप लोगों को वहाँ से निकाल दिया आप मुझे 500 रुपये दे दो पुलिस को देने के लिए तब मैंने बोला ओ चचा पहली बात तो कोई भी पुलिस वाले के पास नहीं जा रहा था आप ज़बर्दस्ती हमको ले गए और दूसरी बात मुझे नेपाली आती है आप दोनों के बीच पैसों वाली कोई बात नहीं हुई फिर अपन ने थोड़ा नेपाली भी उसको बोल कर दिखा दी फिर वो भी समझ गया की उसकी आज की मेहनत खराब हो चुकी है. आप लोग भी अगर नेपाल जाओ तो किसी के चक्कर में मत आना.

लेकिन उसने एक काम अच्छा किया हमको salleri के लिए एक मात्र बस दिला दी. लेकिन पता चला बस अगले सुबह 4 बजे जाएगी फिर हम वहाँ ही रुक गए.

बस का टिकट 5000 रुपया नेपाली रुपया 3 लोगों का और आज रात का रहना और खाना 3 लोगों का 2000 रुपये नेपाली रुपया
उसके बाद हमने 62000 रुपये को नेपाली रुपयों में एक्सचेंज कराया जो 1.6 के हिसाब से हमको 99200 नेपाली रुपया मिला. थोड़ा रेस्ट करने के बाद हम नेपाली सिम NCELL लेने गये और हमने 99 नेपाली रुपये में एक sim लिया जिसमें 20 रुपया टॉक टाईम और 200 mb डाटा मिला और 150 रुपये का एक रीचार्ज करा लिया 7 दिन के लिए 1 gb डाटा का

शाम को खाना खा कर जल्दी सो गए. ध्यान रखने की बात एवरेस्ट बेस कैम्प ट्रेक में नामचे के ऊपर हर जगह NCELL का नेटवर्क आता है और रिचार्ज कार्ड भी मिलता है.

भाग 2 👇👇👇👇👇

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